Pegasus Spyware जैसे माध्यम से पत्रकारों, राजनेताओं और दूतावासों के मोबाइल फोन पर हमला

Pegasus Spyware जैसे माध्यम से पत्रकारों, राजनेताओं और दूतावासों के मोबाइल फोन पर हमला

Pegasus Spyware एक गंभीर संदेह का मुद्दा बन गया है, जिसके जरिए पत्रकार, राजनेता, और दूतावासों के मोबाइल फोन पर हमले किए जा रहे हैं। इस मामले में, आईफोन बनाने वाली कंपनी एप्पल ने इस चिंता को दर्शाया है और अपने उपयोगकर्ताओं को सावधान किया है। आगे इस मुद्दे के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

पेगासस जैसे स्पाई वायर के माध्यम से पत्रकारों, राजनेताओं और दूतावासों के मोबाइल फोन पर हमला, एप्पल ने चेतावनी दी। एप्पल ने जारी किए गए खतरे के नोटिफिकेशन में पिछली जाँच और रिपोर्ट्स की आधार पर संकेत दिया कि इस तरह के हमले इतिहास में सरकार से जुड़ी ग्रुप्स द्वारा किए जाते हैं। वाशिंगटन: आईफोन बनाने वाली कंपनी एप्पल ने अपने उपयोगकर्ताओं को पेगासस जैसे नवीनतम स्पाई वायर हमलों से चेतावनी देते हुए कहा है कि उनकी ओर से मर्यादित संख्या में लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। स्पाई वायर हमलों की ज़िद में आने वाले व्यक्तियों में पत्रकार, कर्मचारी, राजनेता और दूत शामिल हैं।

ताहां, एप्पल ने इन हमलों के हवाले से जारी किए गए एक बयान में कहा कि ज़्यादा लागत की वजह से स्पाई वायर अक्सर संख्यित में ही इस्तेमाल किया जाता है लेकिन किराए के स्पाई वायर का इस्तेमाल करते हुए हमले जारी हैं और विश्व स्तर पर किये जा रहे हैं।

एप्पल ने अपने जारी किए गए खतरे के नोटिफिकेशन में पिछली जाँच और रिपोर्ट्स की आधार पर संकेत दिया कि इस तरह के हमले इतिहास में सरकार से जुड़ी ग्रुप्स द्वारा किए जाते हैं। यह नोटिफिकेशन उन दिनों सामने आया जब इस साल भारत सहित लगभग 60 देशों में चुनाव हो रहे हैं।

पेगासस जैसे स्पाई वायर (Pegasus Spyware) के जरिए पत्रकारों, राजनेताओं और राजदूतों के मोबाइल फोन पर हमले, एप्पल ने खबरदार की जांच पर इंजाम देता है। हमारे अनुसंधान कभी-कभी पूरी तरह से निर्धारित नहीं हो सकते, लेकिन यह खतरों के चेतावनियों को अत्यधिक विश्वसनीय माना जाता है। इसे बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

पिछले साल एक सर्वेमें में प्रकट हुआ कि दुनिया भर में लगभग 49 प्रतिशत संगठनों के कर्मचारियों के उपकरणों पर हमलों या सुरक्षा उल्लंघनों का पता लगाने में कमी है। साइबर सिक्योरिटी फ़ॉर्म चेक पॉइंट की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले छह महीनों में भारत में मोबाइल मिलियनेयर से प्रभावित संगठनों की हफ्तावारीय औसत 4.3 प्रतिशत थी, जबकि एशिया पैसिफ़िक क्षेत्र में औसत 2.6 प्रतिशत थी।

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